रुद्रपुर – कहते है माँ की जगह कोई नही ले सकता कुछ ऐसा ही सन्देश एक हथनी ने इंसानियत को दी है। घनघोर जंगल के बीच अपनी जान की परवाह ना किये एक ऐसा सन्देश दिया है जिसे सुन कर आप के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। दरअसल आज सुबह आगरा फोर्ड एक्सप्रेस ट्रेन लालकुंआ से काशीपुर को निकली थी। ट्रेन सुबह लगभग 5 बज कर 25 मिंट में पिपलिया रेंज के जंगल से गुजर रही थी तभी आगे से हाथियों का झुंड रेलवे पटरी पार करने लगा। लेकिन झुंड में 5 माह का नर बच्चा ट्रेन की पटरी पार नही कर सका। जिसके बाद लगभग 30 वर्षीय उसकी माँ उसे पटरी से पार कराने के लिए पटरी पर चढ़ गई। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। ट्रेन को पास आता देख हथनी अपने 6 माह के बच्चे की जान बचाने के लिए ट्रेन से जा भिड़ी इस दौरान वह हाथी का बच्चा लगभग 10-15 मीटर जबकि हथनी 50 से 60 मीटर घसीटती हुई आगे छिटक गयी।

इस दौरान माँ और बच्चे की मौत हो गयी। जिसवक्त हथनी अपने बच्चे को बचाने के लिए ट्रेन से भिड़ी उस वक्त ट्रेन की स्पीड लगभग सौ किलोमीटर प्रति घण्टा थी। दो हाथियों की मौत की सूचना पर तराई पूर्वी वन प्रभाग में हड़कम्प मचा रहा। सूचना मिलने के बाद प्रभाग की डीएफओ, एसडीओ सहित टांडा रेंज ओर पिपलपडाव रेंज की टीम भी मौके पर पहुची। यही नही रेलवे की काशीपुर की टीम ओर लालकुंआ स्टेशन की टीम भी मौके पर पहुची। बाद में वन विभाग द्वारा दोनों का पीएम कर शव को जंगल मे दफन कर दिया।

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वही वन विभाग के अधिकारी मामले में रेलवे को जिमेदार ठहराते हुए अग्रिम कार्यवाही की बात कहते हुए नज़र आ रहे है। एसडीओ ध्रुव सिंह भदोरिया ने बताया कि पूर्व में लाल कुआं से गूलरभोज तक ट्रेन की स्पीड कम करने का प्रस्ताव वन विभाग द्वारा रेलवे प्रशासन को दिया गया था लेकिन अब तक उस प्रस्ताव पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है अगर ट्रेन की स्पीड कम रहती तो शायद दोनों हाथियों की जान बच सकती थी।
मृतक हाथियों के आसपास ही कई घण्टे तक डटे रहे हाथी
हथनी ओर उसके बच्चे की मौत के बाद दोनों के शवों के आसपास डटा रहा। वन गुजरो के अनुशार हाथियों के झुंड को भगाने के बाद भी  झुंड जंगल मे आसपास ही मंडराता हुआ दिखाई दिया। घटना स्थल से कुछ दूरी पर  हाथियों के चिंघाड़ने की आवाज भी सुनाई दी।

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