रुद्रपुर – 4 साल के बेटे की हत्या के मामले में आज जिला सत्र न्यायालय की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुशील तोमर द्वारा आरोपी पिता को आजीवन कारावास व तीन हजार का अर्थ दण्ड की सज़ा सुनाई है। इस दौरान अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोड़ा द्वारा कोर्ट के समक्ष 11 गवाह प्रस्तुत किये गए। 14 फरवरी 2014 को खटीमा कोतवाली पुलिस को नांकमता निवासी पान देव असवाल द्वारा तहरीर सौप कर बताया था कि उसकी बेटी चंपा का विवाह मझोला दुगाड़ीगोठ खटीमा निवासी ललित मोहन भट्ट से हुआ था। विवाह के बाद उनके तीन पुत्र हुए। विवाह के बाद पता चला कि ललित मोहन भट्ट झगड़ालू और अपराधी किस्म का व्यक्ति है । ओर वह आये दिन पत्नी चंपा और बच्चों की पिटाई करता रहता है। कई बार उनके द्वारा उन्हें समझाया भी गया।
13 फरवरी 2014 की शाम को ललित मोहन भट्ट ने  मामूली बात पर अपने चार साल के बेटे नीरज को हंसिया से काटकर हत्या कर दी। बीच बचाव करने पहुची पत्नी चंपा पर भी उसके द्वारा धारदार हथियार से हमला कर दिया। जिसमें उसके हाथ की अगुलिया कट गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया। सूचना पर पुलिस ने दूसरे दिन आरोपी ललित मोहन भट्ट को धारदार हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया था। तब से मामला कोर्ट में चल रहा था। आज कोर्ट ने आरोपी पिता को धारा 302 में आजीवन कारावास दो हजार अर्थदंड, धारा 325 में पाँच साल की सज़ा व एक हजार का अर्थ दंड की सज़ा सुनाई है। इस दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दीपक अरोड़ा द्वारा 11 गवाह पेश किए गए।
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