रुद्रपुर – दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अपने चार दिवसीय दौरे के चौथे दिन अल्मोड़ा से दोपहर में रुद्रपुर पहुंचे। जहा पर उन्होंने देवभूमि बिजनेस डायलॉग कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय छोटे बडे, हर वर्ग के व्यापारियों के साथ संवाद किया । जिसमें सभी प्रतिष्ठित व्यापारी समेत अनेक वर्गोंं के व्यापारी ने उप मुख्यमंत्री के समक्ष क़ई बिंदु रखे। इससे पूर्व व्यापारियों ने उनका भव्य स्वागत किया ।

मनीष सिसोदिया ने कहा, दिल्ली की तरह उत्तराखंड में भी रेड राज को करेंगे खत्म
राईस मिल एशोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुरुपोतम अग्रवाल ने उप मुख्यमंत्री के सामने  सबसे पहले अपनी समस्याएं रखी और कहा,  सरकार कहती है कि हम किसान की आय को दोगुना कर देंगे। लेकिन सरकार ने उसे दोगुना नहीं बल्कि आधा कर दिया है।उन्हेांने बताया कि उत्तराखंड में 500 राईस मिलें हैं। जब से राज्य का विभाजन हुआ जब से सबसे ज्यादा दिक्कत जूट को लेकर है। सरकार लच्छेदार भाषण देती है लेकिन व्यापारियों का समाधान नहीं हो पाया है। इसके अलावा कई व्यापारियों ने रेड को लेकर भी अपनी समस्या को रखा। इस दौरान मनीष सिसोदिया ने सभी व्यापारियों की समस्याएं सुनी और फिर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि व्यापारी और सरकार के बीच संवाद होना बहुत  जरूरी है। उन्होंने कहा,आज  मुझे इस बात की खुशी है कि व्यापारियों ने अपनी समस्याओं को बताते हुए उनके समाधान भी बताए हैं। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल और आप पार्टी के काम करने का तरीका ही यह है कि हम जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हैं। पूरा देश आज अरविंद केजरीवाल और आप पार्टी को इस रुप में देखते हैं जिस पर वो भरोसा करते हैं। लोग खुद मानते हैं कि आप पार्टी काम करने वाली पार्टी है। हम काम करने की राजनीति करते हैं। इसीलिए हम संवाद पर यकीन करते हैं। उन्होंने कहा,व्यापारियों की समस्या को सुन कर लगा,लोग रेड राज से परेशान हैं और आप की सरकार आते ही उत्तराखंड में भी दिल्ली की तरह, रेड राज को खत्म करेंगे।
हमने व्यापारियों के अनुरोध पर टैक्स कम कर ज्यादा टैक्स प्राप्त किया
उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने हमसे अनुरोध किया कि टैक्स के रेट को दिल्ली सरकार कम करे क्योंकि उस वक्त वैट होता था। उस वक्त् दिल्ली में साढे बाहर प्रतिशत टैक्स हुआ करता था। क्योंकि व्यापारियों को 100 रुपये का सामान 118 रुप्ये में बेचना पड रहा था जिससे उनके व्यापार पर असर पड रहा था। उन्हेांने कहा कि ऐसे में व्यपारी का ना तो सामन बिकता था और ना ही वो सरकार को टैक्स देते थे। उन्होंने कहा कि ये सभी समस्याएं हमने अधिकारियों के सामने रखी क्योंकि काम तो अधिकारी ही करते हैं लेकिन अधिकारियों ने ऐसा करने से हमें रोकना चाहा कि सरकार टैक्स की दरें बिल्कुल कम ना करे। अधिकारी कहते थे कि ऐसा करने से हमारा तन्ख्वाह देने का बजट कम को जाएगा। उनके अलावा कई अन्य वर्ग के लोग इसके विरोध में आ गए। उन्हेांने कहा कि हम पीछे नहीं हटे और हमने 2015 में पहली बार व्यापारियों के आग्रह पर टिंबर पर साढे बारह प्रतिशत से टैक्स घटाकर  5 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से एक ही वार्षिक बजट में 1 प्रतिशत की टैक्स बढोतरी के रुप् में सरकार को प्राप्त हुई जबकि हमने टैक्स कम किया था। उन्होंने कहा कि हमने यही पाॅलिसी 2016 में अपनाई और 44 चीजों पर हमने साढे बारह प्रतिशत टैक्स को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया। उन्होंने आगे बताया कि व्यापारी वर्ग भली भंति जानता है कि वैट की वजह से व्यापार पर काफी असर पडा है।उन्होंने कहा कि हमारा फाॅर्मूला काम आया और जो बजट 2015 में 30 हजार करोड था वो 2020 में आते आते टैक्स कम करने के बावजूद 60 हजार करोड रुपये हो गया। उन्होंने बताया कि 2010 से 2015 तक 5 सालों में 25 हजार से 30 हजार करोड ही बजट हो पाया था। हमने ईमानदारी की राजनीति की। हमने रेड राज को हमेशा के लिए खत्म कर दिया,टैक्स के रेट कम किए ,दिल्ली में पहले पावर कट होते थे लेकिन हमार मंत्रियों ने सडकों पर खडे होकर खुद ट्रांसफार्मर बदलवाए और व्यापारियों की इस समस्या का भी हमेशा के लिए समाधान किया।
दिल्ली सरकार ने कॉल सेंटर के जरिए कई समस्याओं का किया समाधान,घर पर आकर करते हैं अधिकारी काम
दिल्ली में सरकार अब आदमी के पास जाती है। हमने काॅल सेंटर बनाया है जिसपर काॅल करके कई समस्याओं का समाधान हो जाता है। और समय सीमा पर वो कागज आपको मिल जाएगा और जो एक्जीक्यूटिव आपके घर आया तो उसका भी फीडबैक सीएम ऑफिस लेता है कि आप उस काम से संतुष्ट हैं अगर हां तो उसकी नौकरी बच जाएगी। अब दिल्ली में कोई लाईन नहीं लगती जनता धक्के नहीं खाती। उन्होंने आगे बताया कि व्यापारियों के लिए हमने 2016 में वैट में सरलीकरण किया और 42 प्वांइंट को कम कर 16 प्वाइंट कर दिया । जब हमने इसको इंप्लीमेंट किया तो अन्य कई प्रदेशों के कमिश्नरों ने इसे इंप्लीमेंट करने के लिए मंगवाना शुरु किया।
उत्तराखंड में संसाधनों की कमी नहीं,नियत ठीक हो तो यहां ग्रोथ संभव
उत्तराखंड में सरकार को 25 हजार करोड़ हर साल मिलता है जबकि दिल्ली में हमको हर चीज के लिए एलजी और केंद्र सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है लेकिन ईमानदार राजनीति के चलते हमने दिल्ली में करके दिखाया है और उत्तराखंड तो फुल फ्लेज्ड राज्य है और यहां और अच्छे तरीके से काम हो सकता है।
जितने संसाधन उत्तराखंड के पास है वह अद्भुत है और मैं 10- 15 साल से उत्तराखंड आता रहता हूं मुझे यह लगता है कि सब कुछ अगर यहां पर ठीक हो जाए तो यहां पर ग्रोथ हो सकती है।
गवर्नमेंट और प्राइवेट एजुकेशन दोनों इंपॉर्टेंट है अरविंद केजरीवाल जिस पॉलिटिक्स को देश में लेकर आए हैं वो इनोवेटिव पॉलिटिक्स है। मैंने उनसे 2015 में पहला बजट बनाते हुए एक बात पूछी थी तो उन्होंने कहा कि करना सब कुछ है लेकिन अगर कहीं पर पैसा कम हो और पुल और स्कूल में से एक को चुनना पड़े तो पहले आप स्कूल बनाएं ताकि बच्चे पढ़ सके। हमको 7 साल हो गए हैं हमें ना पुल के लिए पैसा कम पड़ा और ना ही एजुकेशन के लिए पैसा कम पढ़ा। हमने गवर्नमेंट एजुकेशन को क्वालिटी एजुकेशन बनाना है। गवर्नमेंट और प्राइवेट की कोई लड़ाई नहीं है दोनों संस्थानों की जो जिम्मेदारी है वह शिक्षा देने की है लेकिन जो सरकार शिक्षा नहीं दे सकती वो सरकार किस काम की। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग बीजेपी और कांग्रेस को भूल चुके हैं आप एक बार हमें मौका दे कर देखिए आप दोनों ही पार्टियों को भूल जाएंगे।
यह भी पढ़ें :  मासूम की हत्या करने वाले पिता को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा, तीन हजार का लगाया अर्थ दंड

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here